Sunday, June 12, 2011

BEGANI SHADI MEY ABDULLA DEWANA...!!! ( A Friction Story of Real Life)

भारत वर्ष मे शादी करना या हो जाना किसी महापर्व या महायग्य से कम नहीं. यहाँ शादी किन्ही दो व्यक्तिओं का समागम नहीं वरन दो परिवारों या कई रिश्तो का मेल होता हे. परन्तु जीवन के इस  महायग्य मे अक्सर ऐसी यादें या घटनाए होती हे, जो जीवन की कभी ना मिटने वाली स्मृतियों  मे से एक होकर रह जाती हे. किसी के विवाह का चित्रण अपने आप मे किसी बड़ी फिल्म की कहानी रचने से कम नहीं. इस में हर भाव हर द्रश्य का समावेश होता हे. विवाह मे सबसे विचित्र इस्तिथि  वाले व्यक्तिओं मे से कुछ वर, वधु एवं वधु का पिता होते हे. पहले दो व्यक्ति तो महज़ कटपुतली होते हे, जो कभी पिताजी, कभी जीजाजी, या कभी भाभी जी के इशारों पर अजीब अजीब हरकते कर रहे होते हे. और अन्तिम व्यक्ति कर्जा ले कर शेयर बाज़ार मे सब कुछ ख़तम हो चुकी सी दशा में होता हे.
विवाह का दिन गीता मे युद्ध के अन्तिम दिन से कंचित मात्र भी कम नहीं होता. बारात जेसे ही विश्राम स्थल या जनमासे पर पहुचती  हे , एक भयावय एवं अद्भुत द्रश्य प्रकट होता हे. बड़े मोसा जी सबसे पहले लड़की वालो  द्वारा उनकी सेवा मे रखे गए नाइ  के कौशल एवं ध्रेय की परीक्षा लेना शुरू करते हे. दाड़ी बनवाने से लेकर अपने सर पर बचे चंद बालो को देवानंद साहब की तरह सेट करवाने का प्रयत्न  कर लेते हे. बाद मे उन्ही के रिश्ते नातेदारो द्वारा हटाए जाने का प्रयास देखकर, अपनी हठ प्रभुता का परिचय देते हुए अपने चर्बी युक्त एवं काल रात्रि सी छठा वाले शरीर की घिसाई उसके सलमान से कसाव एवं ऐश्वर्या सी श्वेत छठा आ जाने तक की मंशा लिए शुरू करवाते हे. परन्तु बड़े से बड़ा आदमी हारता आखिर अपनों से ही हे. बिचारे बड़े मोसा जी भी राजनीती मे बुडे हो चुके नेता जी , जो हमेशा अपनों के ही निशाने पर ही होते हे, इस प्रकार की इस्तिथि को भांप कर सन्यास का भाव लिए वो पदवी छोड़ देते हे. 

 परन्तु  हमारे  ताऊ जी जिन्होने बार बार खर्चा ना हो एस लिए पूरा जीवन रबर की लोकल चप्पल मे ही गुजार दिया, और पहली बार अपने भतीजे  द्वारा दिए गए जूतों का उपभोग कर रहे थे. वो लगभग किसी बोहोत ही अनुभवी एवं बडे वैज्ञानिक का सा धेर्य लिए इन जूतों को नाना प्रकार से चमक वाने का प्रयतन करने मे लगे थे. बिचारा मोची भी अपने जीवन भर का अनुभव एवं कौशल उन जूतों मे झोक अब हर की अन्तिम सांसो को गिन रहा होता हे.

एक तीसरे ही द्रश्य मे सबसे एहम व्यक्ति यानि हमारे जीजाजी जो दोनों पक्ष के लोगो से नाराज अलग ही सभा जमाए बेठे होते हे. भाई बात भी सही हे! बस रुकने पर ना तो पहले उतारने का आग्रह किया गया और ना ही रास्ता दीया गया, और तो और शरबत का इनके सामने आने वाला ग्लास भी पंक्ति मे दूसरा था. अब इस अपराध पर खफा होना और जल्दी ना मानना तो हर जीजा का अपने साले की शादी मे लाज़मी हे.

अंततः बैंड वालो द्वारा आधे घंटे तक अपनी कला का जबरदस्त प्रदशन करवा लेने के बाद जब दुल्हे के पिता ये महसूस कर लेते हे की थोड़ी और हुई देर उनके इकलोते सुपुत्र के विवाह को बिना सुर ताल का कर सकती हे,  बारात को रवाना हनी का इशारा किसी रेलवे के झंडी धारक अफसर की तरह करते हे. किसी तरह शुरू हुई ओप्चारिक्ताए कुछ पल बाद ही बड़ी मामी जी के द्वारा रोकी जाती हे, जो अपनी माधुरी और मीनाकुमारी के समागम वाली पुत्री के आए बिना बारात का आगाज ना होए का दम भरती हे. लड़की वालो द्वारा चाहू और का युद्ध कौशल प्रकट करने के पश्चात् बारात विवाह स्थल की और किसी सजी धजी चतुरंगिनी सेना की तरह कुच करती हे.

हमारे यहाँ सड़क पर चल रही बारात किसी मनोरंजक चलचित्र से कम नहीं होती हे.  नाना प्रकार की फ़िल्मी धुने एवं उस पर अपने ही प्रकार का विचित्र नृत्य देखने सा बनता हे. सबसे खास कुच धुनों मे - आज मेये यार की शादी हे, ये देश हे वीर जवानों का एवं नगीन की मशहूर धुन होती हे, और इन सब मे जान फुकता रिशेत्दारो का नृत्य. नगीन की धुन पर शायद ही कोई नाग या नगीन आज तक बाहर आए हो परन्तु हमारे बरातियो मे से कुछ के अन्दर तो सच के सपेरे और नगीन सी छठा दिखने लगती हे. रुमाल से बनी बीन और शराब के नशे में लेट लेट कर सड़क साफ करना इस नृत्य की मुख्या धारा होती हे. वेसे इन सबके बिना हमारे देश मे शायद ही किसी शादी का चित्रण भी किया जा सकता हो.  शादी मे आनंद का भाव होना उतना ही जरुरी हे जितना खाने में नमक. परन्तु ये भी हमारा कर्तव्य बनता हे की किसी भी शादी और किसी की भी शादी मे नमक इतना ना बड़ जाए की,  उसकी कर्वाहट कुछ चंद लोगो के जीवन भर की व्यथा बन कर रह जाए.

--- लेखक: सौरभ श्रीवास्तव
      दिनाक: १२-०६-२०११
      स्थान: अपने घर का कमरा....!!!!!!!


Wednesday, January 26, 2011

SHUNYA KI BHANWAR ME FASA EK PATHIK !!!

शुन्य की इस्तिथि मे होना जीवन के लिए सदा कष्टकारी होता हे. आज के दोर मे जब आबादी के साथ आमदनी के नए व् निरंतर स्त्रोत बड़े हे, मध्यम वर्ग का विकास बोहोत तेज़ी से हुआ हे. अब मध्यम वर्ग में भी बोहोत सी  श्रेणी विअक्सित हो गई  हें. इस वर्ग का व्यक्ति कम साधनों के साथ बोहोत कुछ पाने की इच्छा से ग्रस्त हे. यह बात ही उसे नए आयाम कायम करने मे मदद करती हे. परन्तु यह बात ही उस के दुख का कारन भी हे. आज इस वर्ग का व्यक्क्ति सदेव एवं निरंतर अपने जीवन की आहुति देते हुए कष्ट में जीवन यापन करता रहता हे. आज वो अपने आप को न तो इस किनारे न ही उस किनारे पाता हे. यही उस के जीवन की विडम्बना हे और ये ही उस के जीवन की व्यथा. मानो शुन्य के भंवर मे फसा रहना ही उस के जीवन का उद्देश्य हे. 

Sunday, January 9, 2011

Theory of Failure !!!!

If you come at 3rd position in class and is very sad, because wanted to be at 1st position. Your parents, teachers and others always says one thing that do more hard work to get the 1st position next time and you will get it then. But there is something else also which may help to not only get that position but to set a Milestone. Just look near to you, you will find someone who always get very less marks or only passing marks, but is very happy & satisfied with whatever he is doing. Now just try to think & find out that how a person can be satisfied with such low marks. May be it is not easy to get the answer, but one learning is here, that we can be satisfied at what ever we have and in every situation. That's actually the key of success. Remember success does not lie in achieving first position; success does not lie in achieving more & more. It actually lies in SATISFACTION. Yes, it is satisfaction which helps us not only achieving 1st position in life, but also setting an unachievable mile stone for every one. First try to be satisfied with what ever you have and then move on for rest.