Wednesday, January 26, 2011

SHUNYA KI BHANWAR ME FASA EK PATHIK !!!

शुन्य की इस्तिथि मे होना जीवन के लिए सदा कष्टकारी होता हे. आज के दोर मे जब आबादी के साथ आमदनी के नए व् निरंतर स्त्रोत बड़े हे, मध्यम वर्ग का विकास बोहोत तेज़ी से हुआ हे. अब मध्यम वर्ग में भी बोहोत सी  श्रेणी विअक्सित हो गई  हें. इस वर्ग का व्यक्ति कम साधनों के साथ बोहोत कुछ पाने की इच्छा से ग्रस्त हे. यह बात ही उसे नए आयाम कायम करने मे मदद करती हे. परन्तु यह बात ही उस के दुख का कारन भी हे. आज इस वर्ग का व्यक्क्ति सदेव एवं निरंतर अपने जीवन की आहुति देते हुए कष्ट में जीवन यापन करता रहता हे. आज वो अपने आप को न तो इस किनारे न ही उस किनारे पाता हे. यही उस के जीवन की विडम्बना हे और ये ही उस के जीवन की व्यथा. मानो शुन्य के भंवर मे फसा रहना ही उस के जीवन का उद्देश्य हे. 

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